सोमवार, 29 फ़रवरी 2016

परिस्थितियों के मद्देनजर धीमी पड़ गई है प्रगति

ड्रीम द्वारका परियोजना अपने लक्ष्य से पीछे चल रही है। वर्ष 2016 में  वसंत पंचमी के अवसर पर 12 फरवरी को इसका अपना तन कार्यरूप लेने का निश्चय था मगर ऐसा हो नहीं सका। इसका मुख्य कारण हमारे पास उपलब्ध परिस्थितियां और संसाधन हैं। बिना अनुकूल परिस्थिति और न्यूनतम संसाधन के इसके तन को वृहत जनसमुदाय को सौंपना उचित नहीं है। हमारे पास समाज के सेवार्थ क्या योजनाएं हैं जब तक यह स्पष्ट रूप से अपने पास उपलब्ध नहीं हो तब तक  समुदाय से सहयोग की अपेक्षा नहीं रखनी चाहिए।

कोई भी व्यक्ति किसी भी अपरिचित पर विश्वास तभी करता है जब साक्ष्य के लिए ठोस प्रमाण सामने उपलब्ध हों। यह ब्लॉग एक साक्ष्य अवश्य  है मगर इस ब्लॉग की अपनी सीमा है और जब इस सीमा के विस्तार के लिए एक स्वतंत्र तन टॉकिंग व्यूज पर मिल गया है तो जब तक टाकिंग व्यूज पर ड्रीम द्वारका परियोजना का स्वस्थ और पुष्ट तन साकार रूप नहीं लेता तब तक इसकी प्रगति धीमी बनी रहेगी।

इसका तात्पर्य यह नहीं है कि गति इतनी धीमी पड़ जाय कि जीवन को लेकर ही संदेह उत्पन्न हो जाय।

यह परियोजना जीवित है। बेहद धीमी चाल से  चल रही है। मैं इसके जीवित होने की पुष्टि कर रहा हूं। यह तेज गति से चले और सरपट दौड़ते हुए लोगों की सेवा कर सके इसके लिए ठोस कदम धीमे-धीमे ही सही उठाए जा रहे हैं। अब कोई तिथि निर्धारित करने से पहले इसके पुष्ट तन के लिए काम हो रहा है।

यह काम 31 मार्च से पहले पूरा हो और नए वित्त वर्ष के साथ यह अपने तन के साथ आकार ले इसके प्रयास जारी हैं।

ईश्वर कृपा करें कि नए वित्त वर्ष 01 अप्रैल 16 से पहले यह साकार होकर सामने आ जाय।


सोमवार, 8 फ़रवरी 2016

अटल इरादा : सधे कदम और धीमी चाल से दूर तक जाने का हौसला, अपने समय की चुनौतियों का हल पाने का भरोसा

चाल धीमी तो है मगर कदम सधे हुए हैं। संसाधन न्यूनतम हैं पर हौसले बुलंद है। आने वाला समय परिवर्तन का साक्षी होगा इसमें कोई संदेह नहीं है।

पिछले पोस्ट में तय किया था कि एक सप्ताह के भीतर ड्रीम द्वारका का तन तय कर लूंगा और क्या स्वरूप अंततः होगा इसे तय कर ही आगे बढूंगा। नीयत समय पर ऐसा हो गया। इसलिए पूरा संतोष है।

ड्रीम द्वारका एक ब्लॉग के रूप में अपना अस्तित्व बनाए रखेगा जहां इसके विचार मुक्त रूप में रखे जाएंगे। 


तन के रूप में पिछले सप्ताह इसे अपना दूसरा घऱ www.talkingviews.com पर मिल गया है। यह घर फिलहाल किले के रूप में नहीं बल्कि आश्रय स्थल के रूप में कार्यरत होगा । कालक्रम में यह मजबूत किला बनेगा।  दूर दूर से चल कर यहां तक इसके निवासी पहुंचेंगे। इसके आश्रय में लोगों को एक नया जीवन मिलेगा।


नया जीवन जो तन को पूर्ण स्वस्थ, मन को प्रतिपल प्रसन्न और जीवन को आनंदमय रखेगा।

टॉकिंगव्यूज के स्वत्वाधिकारी ऐसे व्यक्ति मिले हैं जिन पर विश्वास किया जा सकता है। दरअसल व्यक्ति का चरित्र एक दो दिनों में नहीं बनता और ना ही मौसम की तरह रंग बदलता है। ये ऐसे चरित्रवान हैं जिन्हें साथ लेकर दूर तक , देर तक चला जा सकता है।

उनका चरित्र स्थिर है, ऐसा अभी दिख रहा है। ईश्वर उन्हें और उनके चरित्र को स्थिर बनाए रखे यह कामना है।

स्थिर प्रवृत्ति के लोग ही प्रारब्ध को चुनौती दे पाते हैं । विवश होकर सिरजनहार को उन्हें अवसर देना पड़ता है। 

हम किस प्रारब्ध को लेकर आए हैं यह नहीं जानते पर अपना जीवन लक्ष्य जान सकें और इस पर स्थिर रह सकें तो जीवनकाल में युगसत्य बन जाते हैं। मैं युगसत्य नहीं बनना चाहता लेकिन अपने लक्ष्य को जानता हूं। जिस सोच पर बचपन से चला हूं , अब तक टिका हूं और शेष बचे समय में भी टिका रहूंगा।

मैं यह मानता हूं कि मुझे अपने जीवन का लक्ष्य पता है। अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए मेरे पास जो संसाधन उपलब्ध हैं उनसे अपने लक्ष्यों को अवश्य प्राप्त करूंगा।

इस तन की रक्षा के लिए आवश्यक सामग्रियां जुटाना उसका काम है जिसने मुझे इन विचारों के साथ धरती पर भेजा है । इस तन के साथ जुड़े अन्य परिजनों, पुरजनों का साथ बनाए रखना भी उसीकी जिम्मेदारी है। इस लक्ष्य के लिए संसाधनों का इंतजाम भी उसी को करना है। मुझे तो बस परिणाम की अपेक्षा किए उन रास्तों पर लगातार चलते रहना जिनसे लक्ष्य की पूर्ति होगी।

मैं उसके दिखाए लक्ष्य की ओऱ ही बढ़ रहा हूं।

ड्रीम द्वारका का जन्म अक्षय नवमी तिथि को वर्ष 2015 में होना इसीका अंग है। अब इसका अगला चरण अपने नवजात तन के रूप में www.talkingviews.com पर 12 फरवरी 2016 को श्री पंचमी यानि सरस्वती पूजा के अवसर पर प्रकट होगा। 

मां भगवती इसे पूर्णता देंगी।  

अब इस पोस्ट और इन विचारों को पूर्णता देता हूं।

गुरुवार, 28 जनवरी 2016

ड्रीम द्वारका अभियान की धीमी प्रगति पर एक तटस्थ आकलन

आज शुक्रवार है। 29 जनवरी 2016 को यानि आज इस अभियान के आरंभ के लगभग तीन महीनों का एक तटस्थ आकलन आवश्यक लग रहा है।

कार्तिक शुक्ल नवमी यानि 20 नवंबर 2015 को अक्षय नवमी तिथि को यह ब्लॉग आरंभ हुआ है। इस तिथि से पहले भी ड्रीम द्वारका को लेकर चर्चाएं कुछ मित्रों के साथ हुई थी और स्वतः प्रेरणा से एकल प्रयास के तहत 20 नवंबर को अंततः इसका जन्म हुआ है।

हर महीने दो पोस्ट प्रकाशित हो रहे हैं। यह अभीतक केवल मेरे द्वारा लिखा, देखा और समय समय पर पढ़ा जा रहा है। इसका प्रचार प्रसार भी मैंने कुछ खास नहीं किया है। केवल दो मित्र जो संभवतः इस परियोजना के भागीदार बन सकें उनके साथ इस पर चर्चा हुई है। दोनों मित्रों ने अपना यथासंभव सहयोग देने का भरोसा भी दिया है। लेकिन इन दोनों ने भी अभी तक यह ब्लाग खोल कर खुद देखा है ऐसा नहीं लगता।

हालांकि इस परियोजना को प्रचारित प्रसारित करने के लिए मैं व्यक्तिगत स्तर पर अपने पास उपलब्ध अधिकतम समय दे रहा हूं। मेरे जानकार जितने व्यक्ति हैं उनके साथ इस पर लगातार चर्चाएं कर रहा हूं।

यह ब्लॉग शुरु होने के तुरंत बाद अपने एक मित्र के साथ कई दौर की चर्चाएं हो चुकी हैं जिनका उद्देश्य ड्रीम द्वारका को एक तन इंटरनेट पर उपलब्ध करना है। मुझे लगता है कि मेरे विचारों के प्रचार प्रसार के लिए समर्पित एक वेबसाइट या किसी अन्य वेबसाइट के सहयोग से ऐसा स्थान वेब पर उपलब्ध होना चाहिए जहां पर सारे तथ्य रखे जा सकें और इनसे लाभ उठाने के लिए हर वह व्यक्ति स्वतंत्र हो जो इसे देखना चाहे, पढ़ना चाहे और इसके माध्यम से लाभ उठाना चाहे।

सोशल मीडिया पर ऐसी कई वेबसाइट हैं जो थोड़ी बहुत सीमाओँ के साथ यह सुविधा दे सकती हैं लेकिन मैं इनका उपयोग करूं यह अभी तय नहीं कर पाया हूं। लेकिन मुझे लगता है कि जितना जल्दी यह फैसला कर लूं उतना बेहतर होगा क्योंकि काल का चक्र कभी थमता नहीं और हर पल समय शेष होता जा रहा है यह मैं अच्छी तरह जानता हूं।

ऐसे में अगला सप्ताह निर्णायक होना चाहिए।

बीते सप्ताह , 21 जनवरी से 27 जनवरी तक हमने एक अभियान चलाया । इस अभियान के तहत भारत गणतंत्र उत्सव India Republic Week पूरे सप्ताह मनाने का न्यौता लोगों को दिया गया। उनसे आग्रह किया गया कि आप देशभक्तिपूर्ण लेख लिखें, विचार व्यक्त करें, दोहे लिखें, कविताएं लिखें और ईमेल आइ डी-dreamdwarkapsmt@gmail.com पर भेज दें। लोगों में उत्साह जगे इसके लिए इनाम की व्यवस्था भी रखी गई। वॉट्सएप समूह  An Initiative Group और अंग्रेजी हिन्दी समाचार पोर्टल क्रमशः  www.facenfacts.com और www.jantajanardan.com पर इस संबंधी पोस्टर खबरें भी डालीं गयीं।

लेकिन किसी भी व्यक्ति का कोई मेल इस संबंध में पूरे सप्ताह नहीं प्राप्त हुआ।

किसी के द्वारा कोई मेल नहीं भेजना क्या दर्शाता है ?


  1. प्रचार प्रसार में कमी रही  
  2. योजनाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया नहीं गया
  3. देशभक्ति के प्रति लोगों में अभिरुचि नहीं है
  4. ड्रीम द्वारका के प्रति लोगों में विश्वास नहीं है
  5. इनाम का प्रस्ताव आकर्षक नहीं है
  6. अन्य कोई कारण 
जो भी व्यक्ति, जब कभी इस ब्लाग को पढ़ें वह इस पर अपने सुझाव ईमेल आइ डी dreamdwarkapsmt@gmail.com पर भेज सकते हैं।


वॉट्स एप ग्रूप एआईजी का प्रसार लगभग एक सौ व्यक्तियों में है। इसके अलावा दो तीन और वाट्स एप समूह जिसके सदस्यों की संख्या तीन सौ से अधिक होगी में यह संदेश एक बार 21 जनवरी 2016 को भेजा गया था। इक्कीस जनवरी के बाद यह संदेश दोबारा नहीं प्रसारित किया गया। यानि लगभग पांच सौ व्यक्ति तक यह संदेश कम से कम एक बार तो भेजा गया लेकिन इसके बाद आक्रामक तरीके से इसे बार-बार दोहराया नहीं गया।

संदेश बार- बार नहीं दोहराने के कई कारण हैं । इनमें से सबसे प्रमुख ड्रीम द्वारका का अपना तन  नहीं होना है। इसके तन के बारे में अगले सप्ताह तक हर हाल में सुनिश्चित फैसला कर लेना है।

अभी का बस यही संकल्प

ड्रीम द्वारका अपने उद्देश्यों को प्राप्त करे इसके लिए और अधिक स्पष्टता के साथ ठोस कदम उठाने हैं।  

शुक्रवार, 15 जनवरी 2016

मकर संक्रान्ति के अवसर पर 15 जनवरी 2016 को ड्रीम द्वारका परियोजना का लोकार्पण

नई दिल्लीः 15 जनवरी 2016

ड्रीम द्वारका परियोजना आज विधिवत आम जन के सेवार्थ समर्पित है। यह परियोजना जीवनशैली में सुधार के साथ हम में से हर किसी की समस्याओं के समाधान में यथासंभव सहयोग उपलब्ध कराने के लिए आरंभ हो रही है। 

हम यह मानते हैं कि हम मानवों की अधिकांश समस्याएं हमने खुद पैदा की हैं और इनके समाधान के लिए हमें अपने जीवन में सार्थक परिवर्तन के लिए आगे आना चाहिए।

पेशे से एक रेडियो -टेलीविजन पत्रकार और अभिरुचि से धर्म के विज्ञान का शोधार्थी होने के नाते मैंने जो भी ज्ञान अर्जित किया है वह ज्ञान सबजन हिताय सबजन सुखाय समर्पित है। 

आज प्रातःस्नान के साथ मैंने संकल्प लिया है कि मैं अब से अपना संपूर्ण जीवन मां भगवती के भ्रामरी रूप के उद्भव और संरक्षण के लिए बिताउंगा।

मैं यह मानता हूं कि आज दुनिया भर में अज्ञानवश कीटों के विरुद्ध एक विनाशकारी अभियान चल रहा है जिसके परिणाम अन्ततः मानवों को ही भुगतने पड़ रहे हैं। 

जिस तरह एक वन प्रदेश में सभी जीव जंतुओं के सिरमौर के रूप में सिंह या बाघ का होना पारिस्थितिक तंत्र की संपूर्णता का परिचायक होता है ठीक उसी तरह एक आत्म निर्भर मानव नियंत्रित गांव और नगर तंत्र में  कीट समाज के सिरमौर भ्रमर का होना अनिवार्य  संकेतक है। 

मगर दुर्भाग्यवश कहीं से भंवरों को बचाने का अभियान कहीं नहीं दिख रहा क्योंकि उसकी आवश्यकता और उपयोगिता को गंभीरता से नहीं देखा जा रहा है। 

मानव की खाद्य आवश्यकताओं के लिए कीट समाज की स्वस्थ और सम्यक उपस्थिति अनिवार्य है पर कीटों के विविध वंश को कीटनाशकों द्वारा नष्ट किया जा रहा है। 

ड्रीम द्वारका अभियान के अंतर्गत गांव और महानगर की हर छत पर ऑरगेनिक फॉर्मिंग को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा।  हर छत चाहे वह छोटा हो या बड़ा इसके कुल क्षेत्र के एक तिहाई हिस्से में मौसमी फूल औऱ , एक तिहाई हिस्से में मौसमी सब्जी उगाने का लक्ष्य रखा जाएगा। बाकी बचे एक तिहाई हिस्सा का आधा छत के उपयोगकर्ता  परिवार के लोगों के बैठने के लिए तथा आधा हिस्सा स्थायी महत्व के झाड़ीदार वनस्पतियों के लिए आरक्षित  होगा।

यहां उगायी जा रही वनस्पतियों पर किसी भी तरह के कीटनाशक का प्रयोग पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। इनमें रासायनिक खाद नहीं डाले जाएंगे।

इसके लिए हम एक व्यापक जनजागृति अभियान चला रहे हैं। 

इस अभियान में हमें आपका सहयोग चाहिए। 

यदि आप प्रोफैशनल हैं और अपना समय समाज के लिए दान कर सकते हैं तो अपनी विशेषज्ञता का लाभ हमारे आम उपभोक्ताओं को दीजिए। हम देश की राजधानी दिल्ली में द्वारका सब सिटी की सोसाइटीज में अपना जनजागरण अभियान चलाएंगे। 

इन अभियानों में अपने कौशल से आप उनको सलाह सेवा दे सकते हैं। यदि आपके पास बेचने के लिए कोई उत्पाद है तो आप अपने उत्पाद के सैंपल के साथ इस अभियान में भाग लेकर अपने उत्पाद बेच सकते हैं।   

पेशे से एक रेडियो टेलीविजन पत्रकार होने के नाते मैं किसी भी व्यक्ति -छात्र-छात्रा को रेडियो और टेलीविजन में एनाउन्सर, रेडिय़ो जाकी, न्यूजरीडर, प्रजेन्टर और कार्यक्रम निर्माण की हर जानकारी निःशुल्क उपलब्ध कराने का वचन देता हूँ। 

यदि कोई भी व्यक्ति वाक कला यानि बोलने की कला सीखना चाहता है तो उसकी मदद के लिए एक प्रोफैशनल तरीके से तैयार कोर्स उपलब्ध है जिसका संचालन हमारे अभियान के लिए होगा। 

इसके अलावा हम प्रिन्ट मीडियम या तेज गति से उभर रहे इंटरनेट यानि वेब पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करने के इच्छुक प्रशिक्षुओं की हरसंभव मदद के लिए तैयार हैं। 

प्रशिक्षण के  लिए फिलहाल हमारे दो केन्द्र कार्यरत हैं। इनमें से एक जनकपुरी तथा दूसरा द्वारका में है। 

हम जल्दी ही धर्म और अध्यात्म के क्षेत्र में भी आत्मिक उत्थान के लिए प्रशिक्षण शिविर शुरु करने जा रहे हैं जहां आकर कोई भी व्यक्ति अपने तन को स्वस्थ बनाने के उपाय और मन को प्रसन्न रखने की कला सीख सकेगा। 

हर आयुवर्ग के लोग इस अभियान में संग चलने के लिए आमंत्रित है। 


शुक्रवार, 25 दिसंबर 2015

ड्रीम द्वारका कारोबारी आमंत्रण


                                                                 
ड्रीम द्वारका मिशन द्वारका सबसिटी ( दिल्ली ) में 14 जनवरी 2016 को शुरु
                 
ड्रीम द्वारका कारोबारी आमंत्रण

आज 25 दिसंबर 2015 है। 24 औऱ 25 दिसंबर 2015 की तिथि बेहद महत्वपूर्ण है।

ये वो तिथियां और 24 घंटों का संक्रमण काल है जब दुनिया की तीन प्रमुख विचारधाराओं इसाई, मुस्लिम और सनातन भारतीय हिन्दु का संगम हो रहा है। ऐसा संयोग सदियों नहीं हजारों सालों में एक बार आता है। जो ऐसे पल की अहमियत समझते हैं वे कुछ कर गुजरते हैं।


सल्लाहो अलैहो वसलल्म हज़रत मोहम्मद साहब का अवतरण दिवस, प्रभु के प्यारे, सबके राजदुलारे शांति दूत ईसा मसीह का पुनर्जन्म और मार्गशीर्ष यानि अग्रहायन पूर्णिमा की पावन तिथि एक साथ है ।

इसीलिए आज यानि 25 दिसंबर को ड्रीम द्वारका के कारोबारी सहयोगियों को आमंत्रण दिया जा रहा है।

ड्रीम द्वारका कारोबारी आमंत्रण

ड्रीम द्वारका मिशन में आपका स्वागत है।  इस मिशन से हम आप सभी को जोड़ना चाहते हैं। हमारे साथ जुड़कर आपका कारोबार चमक उठेगा। हम मिलकर एक दूसरे के उद्देश्यों को पूरा कर सकते हैं।

 आप शॉपकीपर हों या सर्विस प्रोवाइडर, छोटे व्यापारी या बड़े कारोबारी, प्रोफेशनल या कन्सलटेंट,  हम आपका प्रचार घर घर करनेवाले हैं। आपके पास खरीद बिक्री के लिए सामान है या फिर देने के लिए कोई सलाह सेवा,   जब आप सेल लगाते हैं तो सामान्य दिनों से अधिक छूट पर सामान या सेवा उपलब्ध कराने की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाते हैं।

हम आपसे हर महीने खास दिनों में एक उत्सव की तरह सेल का आइडिया दे रहे हैं। यह सेल फिक्सड इवेन्ट के रूप में उपलब्ध होगा।

हम भारतीय परंपराओं और उत्सवों के साथ तालमेल बनाकर सेल का आयोजन करने वाले हैं। हर महीने तय दिनों के लिए सेल होगा जिसमें खास लोगों को खास छूट दी जाएगी। ये खास लोग हमारे मिशन से जुड़े परिवार होंगे जिन्हें आप रियायती दर पर अपना सामान बेचेंगे। इस तरह एक ओर आपको सीधे कन्ज्यूमर मिलेंगे दूसरी ओर इन कन्ज्यूमर को सस्ता सामान मिलेगा।

उदाहरणस्वरूप 26 जनवरी 2016 को गणतंत्र दिवस है।

 हम आपसे देशभक्ति सप्ताह मनाने के लिए इनवाइट करते हैं। यह आपके लिए साप्ताहिक सेल के समान होगा जिसमें आप अपनी दुकान या सर्विस सेन्टर में हमारे द्वारा चुने गए लोगों को सेल का लाभ देंगे।

इन सात दिनों में हम द्वारका सबसिटी की अलग अलग सोसाइटी में देशभक्ति सप्ताह का आयोजन करेंगे। आप इन सोसाइटी में भी अपने प्रचार के साथ अपने सामान का सैंपल रख सकेंगे, सीधे कंज्यूमर से ऑर्डर भी ले सकेंगे। यदि आप सर्विस प्रोवाइडर हैं तो अपने ग्रुप की ओर से सर्विस प्रोवाइड करा सकेंगे।

अगले तीन महीनों में तीन साप्ताहिक इवेंट का कैलेंडर इस प्रकार है।

जनवरी 2016 में गणतंत्र और देश भक्ति सप्ताह

फरवरी 2016 में वसंत उत्सव और विद्या की देवी सरस्वती आराधना सप्ताह

मार्च 2016 में महाशिवरात्रि और होली सप्ताह

कहाँ शुरु हो रही है योजना

ड्रीम द्वारका का पहला चरण राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सबसे विकसित और सुनियोजित शहरी क्षेत्र द्वारका सबसिटी में शुरु हो रहा है।

कब शुरु हो रही है योजना

यह अभियान 14 जनवरी 2016 से शुरु हो रहा है।

कौन शुरु कर रहा है

1.पारिजात संचेतना मंडल ट्रस्ट ( रजिस्टर्ड नॉन प्रॉफिट औरगेनाइजेशन)

2.ड्रीम प्रैस कन्सलटेंट लिमिटेड ( रजिस्टर्ड लिमिटेड कंपनी )

आप भी इस मिशन के सहयोगी बन सकते हैं।

पारिजात संचेतना मंडल ने समकालीन समय की समस्याओं के समाधान के लिए यह अभियान शुरु करने का फैसला किया है जबकि ड्रीम प्रैस ने इस मिशन के लिए एक डैडिकेटेड वेबसाइट और प्रचार प्रसार की जिम्मेदारी ली है।  अब हमें आपके सहयोग की जरूरत है।

सहयोग के लिए हम आपसे क्या चाहते हैं

यह अभियान हमारे लिए समाज सेवा के साथ कारोबार को जोड़ने की शुरुआत है। आप कारोबारी होने के नाते जिस रूप में चाहें हमें सहयोग दे सकते हैं।

1. अपने ग्रुप का विज्ञापन हमारी वेबसाइट पर दें
2. योजना की प्रचार सामग्री , पोस्टर, बैनर, हैंडबिल के स्पान्सर बनें
3.योजना से जुड़ने के लिए अपने यहां हमारे साथ जुड़े लोगों के लिए छूट का विवरण उपलब्ध कराएं।

हम यह जानते हैं कि कारोबार का आधार एक दूसरे की उद्देश्य पूर्ति और एक दूसरे पर विश्वास है।
एक जगे हुए व्यक्ति के रूप में हम आप पर पूर्ण विश्वास करते हैं । अपनी ओर से यह वचन देते हैं कि हम आपका विश्वास और भरोसा अपने तन की अंतिम सांस तक नहीं टूटने देंगे।

हमें प्रचार सामग्री उपलब्ध कराएं

आरंभिक चरण में इस योजना के प्रचार प्रसार में धन नहीं बल्कि पोस्टर, बैनर, हैंड बिल उपलब्ध कराएं। पोस्टर- बैनर- हैंडबिल में योजना के बारे में पूरी जानकारी हम उपलब्ध कराएंगे इसमें अपनी दुकान का पता और सामान या सेवा की जानकारी देने के साथ इसके निर्माण की जिम्मेदारी आप लें।

द्वारका के 29 सेक्टर में लगभग डेढ़ हजार छोटी बड़ी रिहाइशी एन्क्लेव हैं। इनमें से लगभग पांच सौ रेजीडेन्ट वेलफेयर सोसाइटी के माध्यम से यह मिशन शुरु करने की योजना है।

1.हम हर सोसाइटी के मेन गेट पर दो टिन के बोर्ड लगवाना चाहते हैं जिसमें स्पेस कर्टसी के रूप में आपकी दुकान / सेवा / संस्थान  का प्रचार प्रसार होगा।
2. हम हर सोसाइटी के आफिस में एक फ्लैक्स / टिन का पोस्टर लगाना चाहते हैं जिसमें आपकी दुकान / सेवा का प्रचार प्रसार हो सकता है।
3. हम इनमें से चुनी हुई कुछ  सोसाइटी की हर ब्लॉक की लिफ्टों के सामने एक छोटा सा बोर्ड लगाना चाहते हैं ताकि योजना का प्रचार प्रसार अधिक से अधिक हो सके।
4. हम साप्ताहिक इवेंट की जानकारी ए 4 साइज़ के हैंडबिल के माध्यम से लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं। आप इसके भी स्पांसर हो सकते हैं।
5. इसके अलावा आरडब्लूए के सौजन्य से हर सोसाइटी का डेडीकेटेड एक वॉट्स एप ग्रुप कार्यरत रहेगा जहां आपके प्रोडक्ट्स या सर्विस का प्रचार प्रसार हो सकता है।

द्वारका, सहित जनकपुरी, तिलक नगर, रजौरी गार्डन , मोतीनगर आदि इलाके मेट्रो के अलावा रोड लिंक से अच्छी तरह जुड़े हुए हैं। इस इलाके के लोगों और कारोबारियों को ड्रीम द्वारका मिशन का लाभ होगा।
ड्रीम द्वारका अभियान में क्या सेवाएं उपलब्ध होंगी

जीवन के लिए आवश्यक हर सेवा इसके दाएरे में सम्मिलित है और हमारे पास जिस क्षेत्र के विशेषज्ञ सहजता से उपलब्ध होंगे उस सेवा पर केन्द्रित इवेंट सोसाइटी परिसर में निःशुल्क आयोजित होगा और वहां रहने वाले लोग इस का लाभ उठाएंगे।

हम यह मानते हैं कि हमारी अधिकांश समस्याएं हम खुद पैदा करते हैं और ज्ञान के अभाव में इनसे जूझते रहते हैं जबकि जानकारी पाकर और इन्हें अपने जीवन में आजमा कर अपनी समस्या को ना केवल दूर कर सकते हैं बल्कि संपन्न, खुशहाल और संतुष्ट जीवन बिता सकते हैं।

पारिजात संचेतना मंडल ट्रस्ट की ओर से हम जगे हुए लोगों को एक दूसरे का साथ जोड़ रहे हैं ताकि हम सब मिल कर अपने आस पास का जीवन बेहतर बना सकें।

पारिजात संचेतना मंडल ट्रस्ट राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में 2007-8 में रजिस्टर्ड गैर लाभकारी संस्था है । इसका गठन मनोज पाठक के नेतृत्व में पांच जगे हुए लोगों के माध्यम से हुआ । यह संस्था अपनी हर सेवा निःशुल्क उपलब्ध कराती है।  संस्था का टैगलाइन है " ज्ञान का प्रवाह मुक्त हो मुफ्त हो "  

ड्रीम प्रैस कंसलटैन्ट्स लिमिटेड भारतीय मीडिया जगत के दिग्गज पत्रकारों द्वारा 2008 में स्थापित समूह है। इस समूह के द्वारा अपने क्लाइंट्स को मीडिया प्रबंधन उपलब्ध कराने के अलावा अंग्रेजी में न्यूज पोर्टल www.facenfacts.com    और हिन्दी में न्यूज पोर्टल जनताजनार्दन डाटकाम  का संचालन हो रहा है।

14 जनवरी से ड्रीम द्वारका मिशन के लिए एक डेडीकेटेड वेबसाइट www.talkingviews/dreamdwarka.com शुरु किए जाने की योजना है।

गुरुवार, 3 दिसंबर 2015

ड्रीम द्वारका परियोजना Vision Document 1

जय सियाराम

पारिजात संचेतना मंडल ट्रस्ट की ओर से दिनांक 29 नवंबर वर्ष 2015 के प्रातःकाल सात बजे बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय परिसर में आई टी एलुमेनी अतिथि गृह के रूम नंबर 17 में Vision Document तैयार किया गया जिसका प्रथम प्रारूप इस प्रकार है। 

इसमें कई संशोधन आवश्यकतानुसार आने वाले दिनों में किए जाएंगे। नए संकल्प और प्रावधान जोड़े जाएंगे। 

महामना पंडित मदन मोहन मालवीयजी के चित्र और उनके पावन आशीर्वाद से पूरित अतिथि गृह में लिखित यह दृष्टि दस्तावेज अपने संकल्प के अनुसार साकार हो।

अक्षय नवमी, 22 नवंबर 2015 की तिथि को ड्रीम द्वारका परियोजना का संकल्प सबका घर एपार्टमेंट द्वारका नई दिल्ली में लिया गया था।

25 नवंबर 2015 को कार्तिक पूर्णिमा तिथि को इस संकल्प को दोहराते हुए इसे अग्रसारित किया गया था।

28 नवंबर 2015 को मार्गशीर्ष यानि माघ मास में कृष्ण पक्ष की तीसरी तिथि को बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित श्री विश्वनाथ मंदिर प्रांगण में इस संकल्प के अनुकूल तथ्यों को देखा और अनुभव किया गया। मंदिर की दीवारों पर गर्भगृह के बाहर, उत्तरी द्वार की दिशा में, मुख्य सभागार में चाणक्य नीति के अनुकूल चंद्रगुप्त को दी गई शिक्षा और सम्राट अशोक के धर्मोपदेश तथा उसके द्वारा संकल्पित कर्तव्य पालन के लिए स्तंभों पर अंकित घोषणापत्र का प्रतिरूप दीवालों पर अंकित देख कर ट्रस्ट की ओर से लिए गए संकल्प की पुष्टि हुई।

तदनुसार 29 नवंबर 2015 को श्री विश्वनाथ मंदिर परिसर में प्रातःकालीन आरती में सम्मिलित होकर ड्रीम द्वारका संकल्प को दृढ़ किया गया। 

                                            ड्रीम द्वारका Vision Document

द्वारका सब सिटी में पौध रोपण कार्यक्रम

कार्यक्रम का उद्देश्य :- द्वारका सबसिटी के लोगों की जीवन शैली में सुधार और उन्हें पूर्ण स्वस्थ बनाना

·        यहां के वासियों को स्वयं अपने सामने ऑरगेनिक फूड के कुछ अंश जैसे सब्जियां उगाने के लिए प्रेरित करना है ताकि उन्हें बिल्कुल शुद्ध हानिरहित सब्जियां मिल सके। 
·        पाचन संबंधी हर तरह के विकारों के समाधान के लिए मिलावट रहित आहार के प्रथम चरण में सब्जियों और कुछ औषधियों को अपने सामने तैयार करना करवाना है।
·        इन वृक्षों, पौधों और वनस्पतियों को लगाने से उपभोक्ता आधारित संस्कृति वाली द्वारका सबसिटी, आदर्श आत्म निर्भर इकाई के रूप में विकसित होगी जहां लोग अपने और अपने परिजनों को स्वस्थ बनाने के साथ- साथ अन्य जीवों यथा पशु, पक्षियों, कीटों और अन्य सूक्ष्म प्राणियों को भी अभय देकर संरक्षित करेंगे।  

द्वारका सबसिटी में लगाए जाने वाले वृक्षों, वनस्पतियों का विवरण

1.     पांच फल वृक्षों, देशी आम, महुआ, इमली, आंवला और जामुन को लगाया जाएगा
2.     पांच औषधि वृक्षों, पीपल, बड़, गुलर, नीम, हर्रे और बहेड़ा को लगाया जाएगा 
इन दस प्रजाति के वृक्षों के अलावा अन्य देशी प्रजाति जैसे अमलतास, गुलमोहर, कदंब, टेसू, सागवान, बेल आदि के रोपण का भी प्रसार किया जाएगा। वृक्ष रोपण के साथ इनके फल, फूल, छाल और पत्तों के प्रयोग की जानकारी भी दी जाएगी ।

3       हर  सोसाइटी में अनिवार्य रूप से एक आंवला और उसके निकटवर्ती पार्कों में अन्य वृक्षों के रोपण के लिए जन चेतना जागृत की जाएगी
4       हर सोसाइटी को रूफ टॉप गार्डन कॉनसेप्ट ( Roof Top Garden Concept-- RTGC ) के लिए प्रेरित किया जाएगा।
5       हर सोसाइटी में उपलब्ध छतों की संख्या के अनुरूप एक तिहाई हिस्सा गमलों में लगने वाले औषधीय पौधों, एक तिहाई हिस्सा सब्जियों और एक तिहाई हिस्सा फूलों के लिए आरक्षित किया जाएगा।    
6       किचन गार्डन में एक ओर औषधीय महत्व की पांच वनस्पतियां 1.तुलसी, 2.एलोवेरा, 3. गिलोय ....4....5....                                
7..पांच मौसमी सब्जियां 1...2...3....4....5......और   
  
8..पांच मौसमी फूल 1...2...3....4.....5.....लगाए जाएंगे।
   
·        इन के रोपण से ना केवल हम मानवों को शुद्ध सब्जियां, फूल और औषधियां मिलेंगी बल्कि अन्य पशु , पक्षी और कीट प्रजाति के अन्य लाभदायक जीवों जैसे भंवरों और मधुमक्खियों का संरक्षण भी होगा जिनकी सहायता से हानिकारक कीटों जैसे मच्छरों के उन्मूलन के साथ शुद्ध शहद भी हर सोसाइटी में हम आवश्यकतानुसार तैयार कर सकेंगे।


 यह प्रथम प्रारूप आज 3 दिसंबर को प्रस्तुत किया जा रहा है। 

यदि हम महीने में केवल एक दिन ड्रीम द्वारका परियोजना के लिए निकाल सकें तो स्वयं को स्वस्थ बनाने के साथ अपने परिजनों का भी उपकार कर सकते हैं।

द्वारका को अपने सपनों के अनुसार बनाने के लिए आइए हम मिल कर प्रयास करें।

 




बुधवार, 25 नवंबर 2015

वर्ष 2015 कार्तिक पूर्णिमा 25 नवंबर पर ड्रीम द्वारका का घोषणा पत्र ( १)


२५ नवंबर २०१५, द्वारका , नई दिल्ली ११००७५

सनातन भारतीय परंपरा और विश्वास के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा तिथि पर काल क्रम में अनेक महत्वपूर्ण घटनाएं हुई हैं । तीन घटनाएँ उल्लेखनीय हैं । पहला जगत पालक विष्णु का  मत्स्यावतार, जगत संहारक शिव द्वारा असुर त्रिपुर का वध और तीसरी घटना सिक्ख धर्म के आदिगुरु नानक देव जी का अवतरण दिवस। 

इन तीन घटनाओं के अलावा भी अनेक घटनाएँ महत्वपूर्ण रूप से इस तिथि से जुड़ी हुई हैं। 

लेकिन काल के फलक पर खचित होती हैं केवल अति महत्वपूर्ण घटनाएं और स्मृति रूप में रह जाती हैं अनेक परंपराएं जो चलन में तो बनी रहती हैं , हमारे आंखों के सामने घटित हो रही होती हैं लेकिन हम देखते हुए भी उनके महत्व को समझ नहीं पाते  । 

इन्हीं परंपराओं में से एक है नदियों , सरोवरों, सागरों में स्नान , विशेष रूप से सागरतटीय क्षेत्र में रहने वाले लोगों द्वारा सागर जल में नौका छोड़े जाने का महत्व, प्रासंगिकता, उपयोगिता और इन्हें क्यों अभी तक ढो रहे हैं लोग,, 

 इसे ढूंढ निकालने की आवश्यकता के साथ 

देव दीपावली  का अति सीमित गिने चुने स्थानों पर अभी भी  चलन...

इन सभी पर अपने विचार रखने की आवश्यकता है। लेकिन अभी इन पंक्तियों को आपके साथ साझा करते समय अपराह्न के एक बजकर ३० मिनट हो रहे हैं और अभी से लगभग डेढ़ घंटे के बाद भोलेनाथ की नगरी काशी के लिए प्रस्थान करना है। इसलिए इस प्रसंग पर आगे आने वाले दिनों में चर्चा की जाएगी।

आज ड्रीम द्वारका परियोजना के घोषणा पत्र का प्रथम चरण जारी हो रहा है। 

२२ नवंबर के पोस्ट को दोबारा पढ़ते हुए हमने देखा है कि कुछ प्रूफ संबंधी त्रुटियां रह गयी हैं।  कुछ स्थानों पर शब्दों के कट पेस्ट में कमी के कारण , विचार भी, बहुत साफ नहीं रह पाए हैं । इन्हीं कमियों के साथ आज का पोस्ट भी जारी हो रहा है

इस विश्वास के साथ कि हमसे जुड़ने वाले लोग हमारी कमियों को माफ करेंगे , 

हमारे उद्देश्यों की नैतिकता को समझेंगे और हमारे प्रयासों में साथ होंगे।


१ ......जल प्रलय का उल्लेख दुनिया की अधिकांश सभ्यताओं में देश, काल और पात्र  के नाम में फेरबदल के साथ मौजूद है। यह स्मृति है उस महाप्रलय की जिसके बाद सीमित संख्या में मानव बचे थे। 


एक बार फिर  जल प्रलय जैसी स्थितियां बन रही हैं। कुछ समझदार लोग इस रोकने या अधिक से अधिक समय तक टालने के लिए प्रयास भी कर रहे हैं लेकिन उनका प्रयास नाकाफी है
 
इस दिशा में सघन प्रयास की जरूरत है। 

२......   समकाल में काल को देखने की क्षमता रखने वाले लोग अति सीमित हैं । इन लोगों की कोई दिलचस्पी वर्तमान संकटों को टालने पर है या नहीं,  यह समझना कठिन है। ऐसे में काल अपनी गति से चल रहा है और हम आप इसके अच्छे बुरे परिणामों को प्राप्त करने के लिए विवश हैं।

३........फिलहाल धरती के सभी जीवों में से केवल एक जाति,  मानव अपने आप को विकसित होता मान रहा है ।  भयानक गति से धरती पर मानव की संख्या बढ़ रही है ।  

अन्य जीवों,  जातियों का ह्रास हो रहा है। संख्या घट रही है। लोप हो रहा है। 

४..... धरती के लिए यह स्थिति पहली बार नहीं है। ऐसा पहले कई बार हो चुका है जब किसी एक जाति की संख्या इतनी अधिक बढ़ गयी कि अन्य जातियों के लिए संकट उत्पन्न हो  गया तो जगत के संचालन कर्ता ने उस जाति की उपयोगिता आवश्यकता और प्रासंगिकता देखते हुए उसके आकार , संख्या में कमी कर दी । 

५......एक समय जिनकी संख्या सबसे अधिक थी उनमें से कुछ जातियां पूरी तरह विलुप्त भी कर दी गईं । आज केवल उनकी अस्थियां , जीवाश्म के रूप में बची हैं । कुछ का जीवाश्म और कोई अन्य प्रमाण भी नहीं है।  

 यह अतीत यानि इतिहास है । 

भविष्य क्या होगा त्रिकालदर्शी ही कह सकते हैं। 

 मैं त्रिकालदर्शी नहीं हूं । 

६....त्रिकालदर्शी नहीं होते हुए भी काल देखने की जो क्षमता इस तन और मन की है उसका आकलन करते हुए ड्रीम द्वारका के प्रथम द्रष्टा के रूप में मैं यह संकल्प लेता हूं कि अपनी द्वारका नगरी में जीवों की संख्या और जाति विविधता के लिए प्राणपन से प्रयास करूंगा।  

७...भारत की राजधानी दिल्ली के दक्षिणी पश्चिमी में विकसित हो रही द्वारका सब सिटी इस संकल्प का प्रथम चरण है । 

८.....द्वारका सुनियोजित वासस्थल और शिक्षा स्थल के रूप में विकसित हो रहा है। एक बड़े वास स्थल और शिक्षा स्थल की आवश्यकताओं के अनुकूल आवश्यकतानुसार वाणिज्यिक केन्द्र भी यहां विकसित हो रहे हैं। 

१०......इन सबके बीच तालमेल से सबसिटी द्वारका में मानव जाति सहित अन्य जीवों की विभिन्न जातियों और उपजातियों  के संरक्षण और विकास  का सफल प्रयोग हो सकता है। 

११......इस दिशा में मेरा तन और मन उपलब्ध संसाधनों के साथ पारिजात संचेतना मंडल के तत्वाधान में अन्य लोगों, संगठनों , संस्थानों को इस प्रयास में जोड़ेगा। 

१२......मत्स्यावतार अपने समय में धरती पर विराजमान जीवों को जल प्रलय से बचाने के लिए हुआ था ......

१३.......हम सभी उसी जगत पालक विष्णु के अंश हैं..........

१४ ....... ड्रीम द्वारका परियोजना हमारे समय  के प्रलय से बचाने में सहायक हो........

इस धरती पर उपलब्ध सभी जीव, सभी आस्था , परंपरा और विश्वास के लोग हमारे साथ मिल कर चलें। 

हम अपनी द्वारका को सबके वास योग्य बनाने में समर्थ हों.........

( ..........जारी.......)